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भोपाल मानसून जलभराव बारिश

भोपाल मानसून और जलभराव गाइड

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भोपाल में मानसून जुलाई से सितंबर तक रहता है, और साल की ज़्यादातर बारिश इन्हीं महीनों में होती है। झीलें भर जाती हैं और शहर हरा-भरा हो जाता है — पर कुछ निचले चौराहे और अंडरपास तेज़ बारिश में जल्दी भर जाते हैं। नीचे अभी का लाइव मौसम, अक्सर पानी भरने वाली जगहों का मैप और सुरक्षा के सुझाव हैं।

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जलभराव वाले इलाक़े

यह सूची अक्सर रिपोर्ट होने वाली जगहों की है और इसके स्थान अनुमानित हैं — यह कोई आधिकारिक बाढ़ चेतावनी नहीं है। हर बारिश में हालात बदलते हैं। कोई जगह सुझाएँ या सुधारें →

अंतिम समीक्षा: 3 जुलाई 2026

जलभराव वाले इलाक़े

6 अक्सर रिपोर्ट होने वाली जगहें — पिन पर टैप करें

तेज़ बारिश में सुरक्षित कैसे रहें

  • भरे हुए अंडरपास और पुलियों से बचें — पानी की गहराई का अंदाज़ा लगाना मुश्किल होता है।
  • बहते पानी में गाड़ी या बाइक न उतारें; आधा मीटर बहता पानी भी गाड़ी बहा सकता है।
  • गिरे हुए बिजली के तारों और खंभों से दूर रहें; जलभराव में करंट का खतरा रहता है।
  • निकलने से पहले IMD का पूर्वानुमान और चेतावनियाँ देखें; बहुत तेज़ बारिश में यात्रा टालें।
  • ज़रूरी नंबर पास रखें — नगर निगम कंट्रोल रूम और आपात सेवा 112।

भोपाल में मानसून कब आता है

मानसून आमतौर पर जून के अंत में पहुँचता है और सितंबर तक रहता है। सबसे ज़्यादा बारिश जुलाई (~370 मिमी) और अगस्त में होती है। महीने-दर-महीने वर्षा और तापमान के लिए देखें भोपाल का मौसम, और हवा की गुणवत्ता के लिए भोपाल AQI

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Manish Mahadware

Curious explorer from Bhopal. After ~20 years in IT, I now build websites, apps and AI-powered utilities for clients, make YouTube videos, and help people invest through mutual funds.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

भोपाल में मानसून कब आता है?
आमतौर पर जून के अंत से सितंबर तक। सबसे ज़्यादा बारिश जुलाई (~370 मिमी) और अगस्त में होती है।
भोपाल में सबसे ज़्यादा पानी कहाँ भरता है?
निचले चौराहे और अंडरपास सबसे जल्दी भरते हैं — जैसे डिपो चौराहा, एमपी नगर के कुछ हिस्से और पुराने शहर की निचली गलियाँ। ऊपर का मैप अक्सर रिपोर्ट होने वाली जगहें दिखाता है (स्थान अनुमानित हैं)।
तेज़ बारिश में क्या सावधानी रखें?
भरे हुए अंडरपास और पुल-पुलियों से बचें, बहते पानी में गाड़ी न उतारें, बिजली के खंभों-तारों से दूर रहें, और IMD की चेतावनियाँ देखते रहें।