भोपाल को धीरे-धीरे दो दिन में देखिए, तो यह दिल खोल देता है। यह एक ऐसा शहर है जिसके अंदर एक नेशनल पार्क है, एक हज़ार साल पुरानी झील, भारत की सबसे बड़ी मस्जिद और कई बेहतरीन संग्रहालय — और थोड़ी ही दूरी पर दो यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल। यहाँ बताया गया है कि एक स्थानीय इसे कैसे प्लान करेगा, चाहे आपके पास एक दिन हो, दो या तीन। हर पड़ाव की पूरी गाइड (समय, टिकट, रास्ता) से लिंक है।
भोपाल में कितने दिन चाहिए?
- 1 दिन: सबसे ख़ास चीज़ें — एक झील, नेशनल पार्क, पुराना शहर और एक सूर्यास्त।
- 2 दिन (आदर्श): पूरा शहर — दिन 1 झीलें और वन्यजीव, दिन 2 पुराना भोपाल और संग्रहालय।
- 3 दिन: साँची या भीमबेटका की डे ट्रिप जोड़ें।
दिन 1 — झीलें, वन्यजीव और झील किनारे सूर्यास्त
सुबह जल्दी और पानी से शुरुआत करें। वन विहार नेशनल पार्क से शुरू करें, जो झील के किनारे है, जब जानवर सक्रिय हों और हवा ठंडी हो। ठीक बगल में है बड़ा तालाब (अपर लेक) — बोट क्लब से बोट राइड लें और पक्षी देखें। अगर दम बचा हो, तो श्यामला हिल्स के संग्रहालय पास ही हैं (देखें दिन 2)।
दोपहर बाद सैर सपाटा जाएँ, झील किनारे का पार्क — टॉय ट्रेन, हरे लॉन और रोशनी से जगमगाता सस्पेंशन ब्रिज — और पानी पर सूर्यास्त के लिए रुकें। किसी अलग नज़ारे के लिए मनुआ भान की टेकरी पर रोपवे से चढ़ें, या पहाड़ी पर बने बिड़ला मंदिर से शहर की रोशनियाँ देखें।
दिन 2 — पुराना भोपाल, मस्जिदें और संग्रहालय
सुबह पुराने भोपाल को दें, उस शहर को जिसे बेगमों ने बसाया। भव्य ताज-उल-मसाजिद (भारत की सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक), नफ़ीस मोती मस्जिद, और झील किनारे की नक़्क़ाशीदार गौहर महल देखें — फिर चौक के बाज़ारों में घूमें (और खाएँ: देखें भोपाल फ़ूड गाइड)। लोअर लेक भी यहीं है।
दोपहर श्यामला हिल्स को दें, भोपाल का संग्रहालय-क्षेत्र: प्राचीन मूर्तियों और कांस्य के लिए स्टेट म्यूज़ियम, मध्य प्रदेश की जनजातियों के कला-भरे उत्सव के लिए ट्राइबल म्यूज़ियम, और खुले आसमान वाला मानव संग्रहालय (IGRMS)। अगर आप संग्रहालय-प्रेमी नहीं हैं तो एक-दो चुन लें — हर एक सचमुच वक़्त माँगता है।
दिन 3 (वैकल्पिक) — एक शानदार डे ट्रिप
अपने पसंदीदा इतिहास का दौर चुनें और पूरा दिन उसके नाम करें:
- बौद्ध और मध्यकालीन: साँची (यूनेस्को स्तूप), नाटकीय पहाड़ी रायसेन किला, और मंदिरों से भरी भूली-बिसरी पहाड़ी ग्यारसपुर (एक डायरी कहानी)।
- प्रागैतिहासिक और प्राचीन: भीमबेटका (यूनेस्को शैल-चित्र), भोजपुर के विशाल अधूरे भोजेश्वर मंदिर के साथ।
- आसान और पास: संस्थापक की पहली राजधानी इस्लामनगर, या केरवा डैम पर आराम भरी एक दोपहर।
परिवार के साथ घूम रहे हैं?
भोपाल बच्चों के साथ आसान है। सैर सपाटा (टॉय ट्रेन, प्ले एरिया, रोशन ब्रिज), बड़ा तालाब की बोट राइड, वन विहार की सफ़ारी-जैसी सैर, मनुआ भान की टेकरी का रोपवे, और खुले आसमान वाला मानव संग्रहालय — ये सब बच्चों के लिए बढ़िया हैं।
सबसे अच्छा समय और आना-जाना
ठंडे मौसम और प्रवासी पक्षियों के लिए अक्टूबर से मार्च में आएँ (पूरी जानकारी: भोपाल मौसम और सबसे अच्छा समय गाइड)। भोपाल रेल (भोपाल जंक्शन व रानी कमलापति स्टेशन), हवाई (राजा भोज एयरपोर्ट) और सड़क से अच्छी तरह जुड़ा है। शहर के अंदर ऑटो और ऐप कैब सस्ती और आसान हैं; शहर से बाहर की डे ट्रिप (साँची, भीमबेटका, रायसेन) के लिए पूरे दिन की कैब करना सबसे आसान है, क्योंकि इन जगहों तक सार्वजनिक परिवहन सीमित है।