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ढलती शाम में भोपाल का लोअर लेक (छोटा तालाब)
Photo: Masterblaster3r / Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0)
भोपाल झील पुराना शहर सूर्यास्त मुफ़्त

लोअर लेक (छोटा तालाब), भोपाल — पुराने शहर में

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भोपाल झीलों का शहर है, और लोअर लेक वह आधा हिस्सा है जिसे ज़्यादातर सैलानी छोड़ देते हैं। जहाँ विशाल अपर लेक सारा ध्यान खींच लेता है, वहीं छोटा तालाब — यानी “छोटी झील” — ठीक पुराने शहर के साथ बैठा है, हर ओर से विरासत में घिरा और चुपचाप ख़ूबसूरत, ख़ासकर दिन की आख़िरी रोशनी में।

दो झीलें, एक कहानी

दोनों झीलें जुड़वाँ हैं, पर उम्र में बहुत फ़र्क है। अपर लेक (बड़ा तालाब) करीब हज़ार साल पुराना है, राजा भोज के समय बना। लोअर लेक बहुत बाद में, 18वीं–19वीं सदी में, ऊपर वाली झील के बहाव को बाँधकर बनाया गया। दोनों एक ऐतिहासिक पत्थर के कॉज़वे — पुल पुख़्ता — से अलग होती हैं, जो लंबे समय तक भोपाल के दोनों हिस्सों के बीच की मुख्य कड़ी रहा। इन्हीं दोनों ने मिलकर शहर को उसका जाना-पहचाना उपनाम दिलाया।

जहाँ अपर लेक खुला और विस्तृत लगता है, वहीं लोअर लेक अपनापन लिए और शहरी महसूस होता है — पुराना शहर इसके किनारे तक चला आता है, और मस्जिदें, पुरानी हवेलियाँ और भोपाल की चहल-पहल पानी में झलकती हैं।

क्या करें

यह कोई टिकट वाली जगह नहीं, बल्कि एक धीमा, मुफ़्त, माहौल से भरा ठिकाना है। किनारे पर टहलिए, नावों और पक्षियों को निहारिए, और इसे सूर्यास्त के लिए तय कीजिए, जब पुराने शहर के गुंबद और छतें नारंगी पानी के पीछे छवि बनकर उभरती हैं। कमला पार्क और लेकफ़्रंट के आस-पास का इलाका शाम की सैर के लिए सुहावना है, और स्ट्रीट स्नैक्स कभी दूर नहीं होते।

एक ख़ामोश पसंदीदा जगह

लोअर लेक आपका आधे घंटे से एक घंटे से ज़्यादा समय नहीं लेगा, और यह आपसे कुछ नहीं माँगता — न टिकट, न कतार। पर यह ठीक उसी तरह की बिना शोर वाली स्थानीय जगह है जो किसी शहर को असली होने का एहसास देती है। अगर आप समझना चाहते हैं कि भोपाली अपनी झीलों से इतना क्यों जुड़े हैं, तो ढलती शाम यहाँ आइए — आपको समझ आ जाएगा।


जून 2026 में स्थानीय जानकारी और पुष्टि करने वाले स्रोतों से सत्यापित। लेकफ़्रंट एक खुली सार्वजनिक जगह है; इसका ज़िम्मेदारी से आनंद लीजिए और अपना कचरा साथ ले जाइए।

MM

Manish Mahadware

Curious explorer from Bhopal. After ~20 years in IT, I now build websites, apps and AI-powered utilities for clients, make YouTube videos, and help people invest through mutual funds.

क्यों जाएँ

  • अपर लेक का पुराने शहर वाला जुड़वाँ, जहाँ हर किनारे पर विरासत है
  • ऐतिहासिक पुल पुख़्ता कॉज़वे से अपर लेक से जुड़ा हुआ
  • मुफ़्त, खुला और पैदल घूमने लायक — सूर्यास्त के समय बेहद ख़ूबसूरत
  • पुराने शहर, लेकफ़्रंट और कमला पार्क की ओर के नज़ारे

त्वरित जानकारी

समय
खुली पहुँच (एक सार्वजनिक लेकफ़्रंट)। दिन के उजाले और सूर्यास्त के समय सबसे अच्छा लगता है।
प्रवेश
मुफ़्त।
सर्वोत्तम समय
अक्टूबर से मार्च, सूर्यास्त के समय, जब पानी के पीछे पुराने शहर की छवि उभरती है।
कैसे पहुँचें
शहर के बीचों-बीच, पुराने शहर के साथ, अपर लेक से बस पूरब की ओर पुल पुख़्ता कॉज़वे के पार। न्यू मार्केट से ऑटो-रिक्शा ₹50–80; पुराने शहर की सैर के साथ आसानी से जुड़ जाता है।

जानकारी सत्यापित: जून 2026 (स्थानीय जानकारी; पुष्टि की गई)

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

भोपाल में अपर लेक और लोअर लेक में क्या फ़र्क है?
अपर लेक (बड़ा तालाब) पश्चिम की ओर की विशाल, प्राचीन इंसानों की बनाई झील है; लोअर लेक (छोटा तालाब) इसका छोटा, नया पड़ोसी है जो पूरब में पुराने शहर के साथ है। दोनों एक ऐतिहासिक कॉज़वे, पुल पुख़्ता, से अलग होती हैं, और मिलकर भोपाल को इसका उपनाम — 'झीलों का शहर' — देती हैं।
क्या लोअर लेक के लिए कोई प्रवेश शुल्क है?
नहीं। लोअर लेक एक मुफ़्त, खुला सार्वजनिक लेकफ़्रंट है। कोई टिकट नहीं — बस किनारे पर टहलिए, ख़ासकर सूर्यास्त के आस-पास।
लोअर लेक घूमने का सबसे अच्छा समय कब है?
दोपहर बाद से सूर्यास्त तक, अक्टूबर से मार्च के बीच, जब रोशनी नरम होती है और पानी के पीछे पुराने शहर का स्काईलाइन छवि बनकर उभरता है।
लोअर लेक कैसे पहुँचें?
यह शहर के बीचों-बीच है, ठीक पुराने शहर के साथ और अपर लेक से बस पुल पुख़्ता कॉज़वे के पार। न्यू मार्केट से ऑटो करीब ₹50–80 लेता है, और यह गौहर महल, ताज-उल-मसाजिद और पुराने शहर के बाज़ारों के साथ आसानी से जुड़ जाता है।

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