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भोपाल के चौक इलाके में शौकत महल का अलंकृत गॉथिक-मुगल-बारोक अग्रभाग
Photo: Harvinder Chandigarh / Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0)
भोपाल विरासत पुराना-शहर वास्तुकला बेगम इतिहास

शौकत महल, भोपाल

· अपडेट: 6 जुलाई 2026 · 4 मिनट पढ़ें
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आप भोपाल के पुराने शहर चौक की किसी तंग गली से गुज़र रहे हैं — कपड़े की दुकानें, मसाले की हट्टियाँ, और दो सदियों से चली आ रही भीड़-भाड़। फिर एक मोड़ मुड़ते हैं — और ठिठक जाते हैं।

एक सड़क के बीचोबीच, आम इमारतों के बीच सिमटा हुआ, एक तीन मंज़िला महल खड़ा है — जिसकी वास्तुकला उसके आस-पास की किसी भी चीज़ से मेल नहीं खाती। नीचे गॉथिक नुकीले मेहराब उठते हैं। ऊपर मुगल झरोखे दीवार से आगे निकलते हैं। यूरोपीय बारोक अलंकरण छत की मुंडेर पर छाए हैं। पूरी इमारत गर्म क्रीम-पीले रंग में रंगी है, ऊपर मुनारानुमा शिखर, और वह वहाँ खड़ी है — जैसे आपका इंतज़ार कर रही हो।

यह है शौकत महल — मध्यप्रदेश की सबसे अनोखी और सबसे कम जानी-पहचानी इमारतों में से एक।

महल की कहानी

भोपाल की बेगमें किसी भी कसौटी पर असाधारण थीं। 1819 से 1926 के बीच इस रियासत पर चार महिलाओं ने राज किया — क़ुदसिया बेगम, सिकंदर जहाँ बेगम, शाह जहाँ बेगम और सुल्तान जहाँ बेगम। उन्होंने मस्जिदें बनवाईं, अदालतें, सड़कें, स्कूल और महल। उन्होंने अंग्रेज़ रेज़िडेंट से बराबरी से बात की। उन्होंने पर्दा अपनी पसंद से किया — और फ़ौज को हुक्म दिया।

शौकत महल सिकंदर जहाँ बेगम के शासनकाल में 19वीं सदी के मध्य में बना। वास्तुकार एक फ्रांसीसी थे — अधिकांश विवरणों के अनुसार, बॉर्बों राजघराने के वंशज, जो फ्रांसीसी क्रांति के बाद भारत आ गए थे और यहीं बस गए। उनका नाम इतिहास ने दर्ज नहीं किया। जो बचा, वह उनकी इमारत है।

यह महल भोपाल दरबार की उस महत्वाकांक्षा को दर्शाता है जो एक साथ कई दुनियाओं से बात करना चाहती थी — गॉथिक भी, मुगल भी, नवाबी भी, और यूरोपीय भी।

अग्रभाग को पढ़ना

सड़क के उस पार खड़े होकर ध्यान से देखें। भूतल नुकीले गॉथिक मेहराबों में खुलता है — वैसे जैसे यूरोपी गिरजाघरों या विक्टोरियाई इमारतों में मिलते हैं। लेकिन अनुपात बदले हुए हैं — लंबे और नाज़ुक, जो इमारत को एक ऊर्ध्वाधर महीनता देते हैं।

दूसरी मंज़िल पर झरोखे हैं — नक्काशीदार कोष्ठकों पर बाहर निकली हुई बंद बालकनियाँ — जो पूरी तरह मुगल हैं। यह रूप अकबर के फ़तेहपुर सीकरी से चला और राजपूत व नवाबी हाथों से होता हुआ भोपाल तक पहुँचा।

ऊपरी मंज़िलों पर बारोक अलंकरण है: नक्काशीदार पदकचिह्न, सजावटी स्तंभ, यूरोपीय ढंग से मुड़ी-घुमी कार्निसें। छत पर शिखर — तीखे, उठे हुए — जो नज़र को ऊपर ले जाते हैं और वहीं रोक देते हैं।

यह इमारत काम नहीं करनी चाहिए थी। किसी तरह करती है।

बगल में सदर मंज़िल

शौकत महल के बिल्कुल पास, उसी परिसर में, है सदर मंज़िल — भोपाल के नवाबों का दरबार हॉल। यहाँ बेगमें औपचारिक दरबार लगाती थीं, अर्ज़ियाँ सुनती थीं, न्याय करती थीं। रूप अलग है — यूरोपीय स्तंभाकारें, मेहराबदार बरामदे, एक संयत सरकारी गरिमा — लेकिन दोनों इमारतें मिलकर एक ऐसे दरबार की कहानी कहती हैं जो एक साथ नवाबी और आधुनिक, इस्लामी और यूरोपीय-प्रभावित था।

सदर मंज़िल अब सरकारी कार्यालय है। अंदर जाना संभव नहीं, लेकिन परिसर के फाटक से बाहर से देखने लायक है। दोनों इमारतें ASI संरक्षित स्मारक हैं।

पुराने शहर की सैर

शौकत महल कोई अकेला गंतव्य नहीं है — यह भोपाल की सबसे अच्छी पुराने शहर की सैर का लंगर है।

महल से निकलकर चौक बाज़ार में उतर जाएँ। यह बाज़ार कम-से-कम नवाबी दौर से इसी रूप में चल रहा है — तंग गलियाँ, छोटे मोर्चे, वही धंधे: इत्र की दुकानें, चूड़ी वाले, हलाल कसाई, कपड़े के व्यापारी — पीढ़ियों से उन्हीं गलियों में। यही वह पुराना शहर है जिसे बेगमों ने चलाया था।

चौक से मोती मस्जिद पास है — सिकंदर जहाँ बेगम की बनवाई नफ़ीस मस्जिद। वहाँ से रास्ता ताज-उल-मसाजिद के विशाल परिसर की तरफ़ खुलता है — एशिया की सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक।

पूरा चक्कर — शौकत महल, सदर मंज़िल, चौक बाज़ार, मोती मस्जिद, ताज-उल-मसाजिद — आधे दिन का सफ़र है। इसे गोहर महल पर ख़त्म करें, जो छोटे तालाब के किनारे बेगम-निर्मित एक और महल है।

कैसे पहुँचें

शौकत महल पुराने भोपाल के दिल में है, न्यू मार्केट से लगभग 3 किलोमीटर। ऑटो ₹60–80 में 15–20 मिनट में पहुँचा देता है। पास में औपचारिक पार्किंग नहीं है — पुराने शहर की सीमा पर कैब छोड़कर पैदल जाएँ।


शौकत महल ASI संरक्षित स्मारक है। बाहरी भाग हमेशा सुलभ है। आंतरिक प्रवेश ASI भोपाल मंडल की अनुमति पर निर्भर है।

MM

Manish Mahadware

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क्यों जाएँ

  • गॉथिक, पुनर्जागरण और मुगल स्थापत्य का अनूठा मेल — मप्र में ऐसा कहीं नहीं
  • भोपाल की प्रसिद्ध बेगम शासकों के युग में निर्मित, 19वीं सदी के मध्य में
  • बगल में सदर मंज़िल — पुरानी अदालत, वह भी ASI संरक्षित
  • पुराने शहर की सैर का द्वार: चौक बाज़ार और ताज-उल-मसाजिद पास में

त्वरित जानकारी

समय
बाहरी भाग: हमेशा सुलभ (यह सार्वजनिक सड़क पर है)। अंदर जाना सीमित और ASI-नियंत्रित है — मुख्यतः बाहरी दर्शन को ध्यान में रखें।
प्रवेश
मुफ़्त (बाहरी भाग)। किसी भी आंतरिक प्रवेश के लिए ASI से संपर्क करें।
सर्वोत्तम समय
सुबह 7–10 बजे — अग्रभाग पर सबसे अच्छी रोशनी और चौक बाज़ार अपने पूरे जोश में। शाम को भी सुनहरी रोशनी रहती है।
कैसे पहुँचें
न्यू मार्केट से ~3 किमी। ऑटो ₹60–80, ओला/उबर ₹50–70। ताज-उल-मसाजिद से पैदल: चौक से होकर लगभग 15 मिनट।

जानकारी सत्यापित: जुलाई 2026 (ASI संरक्षित स्मारक अभिलेख; विकिपीडिया; भोपाल गज़ेटियर)

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

शौकत महल वास्तुकला के लिहाज़ से अनोखा क्यों है?
शौकत महल एक ही तीन मंज़िला अग्रभाग में गॉथिक नुकीले मेहराब, पुनर्जागरण अलंकरण और मुगल झरोखे एक साथ पेश करता है — यह संयोजन मप्र में कहीं नहीं मिलता। कहा जाता है कि इसे एक फ्रांसीसी वास्तुकार ने डिज़ाइन किया था जो बॉर्बों राजवंश के वंशज थे और भारत में बस गए थे।
क्या शौकत महल के अंदर जा सकते हैं?
अंदर जाना सीमित और ASI-नियंत्रित है। यात्रा मुख्यतः बाहरी दर्शन के रूप में करें — अग्रभाग ही असली आकर्षण है और सड़क से पूरी तरह दिखता है।
बगल की सदर मंज़िल क्या है?
सदर मंज़िल भोपाल के नवाबों का दरबार हॉल (दीवान-ए-आम) था — जहाँ बेगमें औपचारिक दरबार लगाती थीं। अब यह सरकारी कार्यालयों में बदल गई है, लेकिन ASI संरक्षित है। बाहर से देखने लायक है।
शौकत महल को पुराने शहर की सैर से कैसे जोड़ें?
शौकत महल + सदर मंज़िल → चौक बाज़ार → मोती मस्जिद → ताज-उल-मसाजिद — यह आधे दिन की सैर नवाबी भोपाल का दिल कवर करती है। सुबह शुरू करें जब बाज़ार जीवंत हो।

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